Hazaro kwaishae!

लेते है जन्म गोद मे जिनकी ,
छोड़ चले आये है उन्हें हम दूर ,
ख्वाहिशे तो हज़ारो है इस दिल मे ,
पर बंदिशे कर देती है मजबूर ,

जिनकी बाहो के झूले मे झूल कर बडे हुए ,
जिनकी ऊँगली पकड़ कर पहली बार खडे हुए ,
जिनके प्यार के सागर मे रोज़ दुप्किया लगाते रहे ,
जिनके आँचल मे गलती कर के भी छुप जाते थे ,

थी जब कलि तो सोचा था ,
फूल बनकर मेह्कऊंगी ज़रूर ,
उस गली उस नुक्कड़ पर लौट कर जाऊंगी ज़रूर
अब जाते भी है तो चार दिन के मेहमान बनकर ,
पर किसका दोष है यह ,किसका है यह कसूर ???

ख्वाहिशे तो हज़ारो है इस दिल मे ,
पर बंदिशे कर देती है मजबूर .

Advertisements

7 comments

  1. Anonymous · September 28, 2009

    good work!!

  2. Anonymous · September 28, 2009

    nice one.

  3. Prasoon Jaiswal · September 28, 2009

    nice one.. Monika !!!

  4. sp · March 4, 2010

    good hai

  5. navneet · March 12, 2010

    senti kar diya monika..bahut achcha likha hai..

  6. Kiran · July 8, 2010

    very true, very well written…

  7. gauri · July 8, 2010

    jo bhi log ghar se bahar rehkar padte ya kaam karte hain…. unn sab ki kahani likh di aapne chand sabdon mein …. 🙂 🙂

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s