Hindi Poems

Hazaro kwaishae!

लेते है जन्म गोद मे जिनकी ,
छोड़ चले आये है उन्हें हम दूर ,
ख्वाहिशे तो हज़ारो है इस दिल मे ,
पर बंदिशे कर देती है मजबूर ,

जिनकी बाहो के झूले मे झूल कर बडे हुए ,
जिनकी ऊँगली पकड़ कर पहली बार खडे हुए ,
जिनके प्यार के सागर मे रोज़ दुप्किया लगाते रहे ,
जिनके आँचल मे गलती कर के भी छुप जाते थे ,

थी जब कलि तो सोचा था ,
फूल बनकर मेह्कऊंगी ज़रूर ,
उस गली उस नुक्कड़ पर लौट कर जाऊंगी ज़रूर
अब जाते भी है तो चार दिन के मेहमान बनकर ,
पर किसका दोष है यह ,किसका है यह कसूर ???

ख्वाहिशे तो हज़ारो है इस दिल मे ,
पर बंदिशे कर देती है मजबूर .

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7 thoughts on “Hazaro kwaishae!

  1. jo bhi log ghar se bahar rehkar padte ya kaam karte hain…. unn sab ki kahani likh di aapne chand sabdon mein …. 🙂 🙂

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