Na chupana.

तू दिल के अरमा दिल मे कभी ना छुपाना ,
कुछ बातें दोस्तो भी ज़रा बतलाना।

ओ रही चलते चलते कभी हार तू ना जाना ,
तेरी तो मंज़िल आएगी तू कभी ना घबराना ,
मेरी बातो को गौर से तू आज़माना ,
तू दिल के अरमा ……………….

सागर के दो किनारे है किस पार तुझे जाना ,
एक पार गम तो दूजी पार ख़ुशी का खज़ाना ,
जिस पार तुझे जाना है तू सोच के जाना ,
तू दिल के अरमा ………………

यह पेड, पौधे , फूल ,पत्ते कलियों का शर्माना ,
वो मदारी का दम दम करके बंदर को नचाना ,
यह खेल है कैसा जाने सिर्फ उपर वाला ,

तू दिल के अरमा दिल मे कभी ना छुपाना ,
कुछ बातें दोस्तो भी ज़रा बतलाना।

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6 comments

  1. Anonymous · September 28, 2009

    hmm 🙂

  2. monika · September 28, 2009

    thanks.. ya u r right.. thats why i had written “kuch baatein” not everything :)…

  3. Anonymous · September 28, 2009

    some things r better left unsaid…btw another nice poem 🙂

  4. Monika Arya · September 28, 2009

    ya i do follow it.. and if u are my friend then u will not have any doubt regarding it:)

  5. Jitendra Chaudhary · September 28, 2009

    हिन्दी ब्लॉगिंग मे आपका स्वागत है।यदि आप लगातर हिन्दी मे ब्लॉगिंग मे करने का मन बनाते है तो आप अपना ब्लॉग < HREF="http://narad.akshargram.com/register" REL="nofollow"> नारद <> पर रजिस्टर करवाएं। नारद पर आपको हिन्दी चिट्ठों की पूरी जानकारी मिलेगी। किसी भी प्रकार की समस्या आने पर हम आपसे सिर्फ़ एक इमेल की दूरी पर है।

  6. Sameer · September 28, 2009

    Kuch baatein <>Doston<> se Na Chupana… [;-)] Do you really follow this??

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