Hindi Poems

Na chupana.

तू दिल के अरमा दिल मे कभी ना छुपाना ,
कुछ बातें दोस्तो भी ज़रा बतलाना।

ओ रही चलते चलते कभी हार तू ना जाना ,
तेरी तो मंज़िल आएगी तू कभी ना घबराना ,
मेरी बातो को गौर से तू आज़माना ,
तू दिल के अरमा ……………….

सागर के दो किनारे है किस पार तुझे जाना ,
एक पार गम तो दूजी पार ख़ुशी का खज़ाना ,
जिस पार तुझे जाना है तू सोच के जाना ,
तू दिल के अरमा ………………

यह पेड, पौधे , फूल ,पत्ते कलियों का शर्माना ,
वो मदारी का दम दम करके बंदर को नचाना ,
यह खेल है कैसा जाने सिर्फ उपर वाला ,

तू दिल के अरमा दिल मे कभी ना छुपाना ,
कुछ बातें दोस्तो भी ज़रा बतलाना।

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6 thoughts on “Na chupana.

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