Hindi Poems · My Fav

Anchahi Khamoshi.

धुंधला हुआ समां ,सहमी परछैया छाने लगी ,
जो सोचा न था कभी वो यादें लौट कर आने लगी ,
अपने अक्स मे भी न ढूंढ पा रहा हू खुद को ,
मेरे वजूद के हिलने की बारी आने लगी ,
अनचाही खामोशी मुझे हरपल रूलाने लगी ।

मेरे कदम तो थे हमेशा ज़मीन पे ,
फिर यह धरती क्यो पैरो के नीचे से जाने लगी ,
निकलती थी दुआ जिसके लिए न चाह कर भी अब बस बद्दुआ ही आने लगी ,
यही बात मुझे हर लम्हा तड़पने लगी ,
जो सोचा न था कभी वो यादें लौट कर आने लगी ,
अनचाही खामोशी मुझे हरपल रूलाने लगी ।

मैंने किसी का कभी चाहा न बुरा ,
फिर क्यो मेरे साथ यह अनहोनी हुई ,
इस पागलपन के लिए कोसता हू अपने आप को ,
मेरी ज़िंदगी अब एक ठहरे हुए पानी कि कहानी बनी ,
अब तो अकेले मे भी तन्हाई मुझ से मुँह छुपाने लगी ,

जो सोचा न था कभी वो यादें लौट कर आने लगी ,
अनचाही खामोशी मुझे हरपल रूलाने लगी ।

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Hindi Poems

Kabhi socha hai?

कुछ चीजे है ऐसी ,जो नही है अपने बसमे ,
पर उनको सोच सोच कर क्या कर दे बंद दे देखना सपने ?

इन छोटी सी आखों को देखा है कभी कितने बड़े बड़े सपनो को
आसरा देती है ,
कुछ चीज़े नही मिली तो क्या हुआ हमारी पलखे नए ख्वाबों को
पनाह देती है ।

तो खुल के मुस्कुराओ आँसू नही बहाना ,
सोचों क्या क्या मिला है तुम्हे बीते पलों पर न जाना ।

देखो उस खुले आसमा को ,जो खुल के मोती बरसाता है ,
क्या कभी सोचा है उसने कि उसके बदले मी वो क्या पाता है ?

थोड़े से आधी तूफ़ान से फूल महकना तो बंद नही करते ,
तो उन छोटी दुःख कि परछाएयो से आख़िर तुम क्यो हो डरते ?

तो क्या हुआ थोड़े गम तुम्हे मिले ,तुमने दूसरो को कभी तो कुछ ख़ुशी के पल दिए ,
हर राह पर मंजिल होती है ,अगर जला लो हौसलों के दिए ।

🙂