Kabhi socha hai?

कुछ चीजे है ऐसी ,जो नही है अपने बसमे ,
पर उनको सोच सोच कर क्या कर दे बंद दे देखना सपने ?

इन छोटी सी आखों को देखा है कभी कितने बड़े बड़े सपनो को
आसरा देती है ,
कुछ चीज़े नही मिली तो क्या हुआ हमारी पलखे नए ख्वाबों को
पनाह देती है ।

तो खुल के मुस्कुराओ आँसू नही बहाना ,
सोचों क्या क्या मिला है तुम्हे बीते पलों पर न जाना ।

देखो उस खुले आसमा को ,जो खुल के मोती बरसाता है ,
क्या कभी सोचा है उसने कि उसके बदले मी वो क्या पाता है ?

थोड़े से आधी तूफ़ान से फूल महकना तो बंद नही करते ,
तो उन छोटी दुःख कि परछाएयो से आख़िर तुम क्यो हो डरते ?

तो क्या हुआ थोड़े गम तुम्हे मिले ,तुमने दूसरो को कभी तो कुछ ख़ुशी के पल दिए ,
हर राह पर मंजिल होती है ,अगर जला लो हौसलों के दिए ।

🙂

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5 comments

  1. विवेक मिश्र · September 28, 2009

    Bahut achchha likha hai aapne.. We should become optimistic always, whatever may be the conditions…

  2. Anonymous · September 28, 2009

    Good work.

  3. Monika Arya · September 28, 2009

    Thanks for taking ur time out ..hmm ya any situation should be balanced whether its motivation or depression..:).. so i have just tried touching different thoughts.

  4. Sameer · September 28, 2009

    Its seems like u r motivating urself good hai its my one of the <>favourite blog<>..now i’ve started analysing u ..jst wait & watch

  5. navneet · March 9, 2010

    as usual.. awesome..

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