Anchahi Khamoshi.

धुंधला हुआ समां ,सहमी परछैया छाने लगी ,
जो सोचा न था कभी वो यादें लौट कर आने लगी ,
अपने अक्स मे भी न ढूंढ पा रहा हू खुद को ,
मेरे वजूद के हिलने की बारी आने लगी ,
अनचाही खामोशी मुझे हरपल रूलाने लगी ।

मेरे कदम तो थे हमेशा ज़मीन पे ,
फिर यह धरती क्यो पैरो के नीचे से जाने लगी ,
निकलती थी दुआ जिसके लिए न चाह कर भी अब बस बद्दुआ ही आने लगी ,
यही बात मुझे हर लम्हा तड़पने लगी ,
जो सोचा न था कभी वो यादें लौट कर आने लगी ,
अनचाही खामोशी मुझे हरपल रूलाने लगी ।

मैंने किसी का कभी चाहा न बुरा ,
फिर क्यो मेरे साथ यह अनहोनी हुई ,
इस पागलपन के लिए कोसता हू अपने आप को ,
मेरी ज़िंदगी अब एक ठहरे हुए पानी कि कहानी बनी ,
अब तो अकेले मे भी तन्हाई मुझ से मुँह छुपाने लगी ,

जो सोचा न था कभी वो यादें लौट कर आने लगी ,
अनचाही खामोशी मुझे हरपल रूलाने लगी ।

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3 thoughts on “Anchahi Khamoshi.

  1. By god s grace ,i have not been in these kind of situation. Its just i have imagined myself over there and tried writing something[:)]

  2. Heyy this is not you..or u’ve lied me hmm Its soo painful…i agree sometimes it happn with everybdy but U are not the rite person to get such pain.

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