Hindi Poems

Khusi :)

एक  नन्ही सी खिलती  हुई  खुशी  मिल  गयी ,

और  वो  खिलती  हुई  हर  पंखुरी  कुछ  नया  कर  गयी ,

यह  प्यार  रुपी  कली  खिलती  नहीं  सबके  आगन  में ,

कितने  खुशनसीब  वो  लोग  जिनके  लिए  खुद  ब  खुद  खिल  गयी ,

जब  तक  रहेगा  प्यार  सच्चा  यह  कभी  मुर्झाएगी  नहीं ,

जब  तक  सीचेंगे  इसे  विशवास से  यह  कही  जाएगी  नहीं ,

इसकी  खुशबू  उन्हें  बांधे  रखेगी  हमेशा ,

अब  रोम  में  बस  चुकी  है  यह  महक  चाहे  वो  चले  जाए  कही ,

खीच  लाएगी  उन्हें  एक  दूसरे  की  ओर ,

और  वो  बंधेंगे  एक  बंधन  में   ज़रूर  ये हमें  है  यकीन 🙂

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