Kyu kare galatiyaan ?

दूर  जिन्हें  जाना  है ,
दिल  चाहे  साथ  उन्हीं  का ,
चंद  पलों  के  लिए  ही  सही  ,
पर  ये  चाहे  करीबिया,

सामने  है  हमारे  फिर  भी ,
सहारा  है  बस  उनकी  यादो  का ,
कल  जब  पास  न  होंगे  वो ,
पीछा  करेंगी  उनकी  पर्छाइया ,

उन्हें  खुश  रखने  के  लिए ,
अपने  जज्बातों  को  कैद  किया ,
दिल  की  आवाज़  को  ,उन  अल्फाजो  को ,
हमने  खुद  ही  अनसुना  किया ,


कैसे  करे  इजहार, इनकार  से  लगता  है  डर ,
उनकी  एक  बेरूखी  दे  जाएँगी  हमे   बेहोशिया,
टूटी  बिखरी  यादें  है  इस  रिश्ते  की ,
फिर  भी  इस डोर ने  हमे  बाँध   लिया ,


रास्ते  अलग है  हमारे  फिर  भी
उनका  इंतज़ार  करके,
न  जाने बार बार  हम  क्यों  करे  गलतियाँ ?

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9 thoughts on “Kyu kare galatiyaan ?

  1. Thanks sen 🙂 ..
    “Jab chah kar bhi khud par
    kabo na kar payo,
    Jo lamhe tumhare nahi hai,
    usme khud ko phir bhi pao,
    Vo tumhe chahe na,
    phir bhi tum karte raho nadaniya,
    Isi liye hum kahe ise galatiyaan..”

    heeeheee..Just simply wrote..Nice lines by you..I always like ur poems:).Thanks for liking it 🙂

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