Hindi Poems

Teri Yaad

This one is dedicated to all those who are in true love 🙂 🙂 ..Hope  you will like it 🙂

पहली बूँद बारिश की,
जब मुझको छू कर जाती है ,
तुझे महसूस कर सकती हूँ ,
तेरी बहुत याद आती है ,

हर दिन सूरज की किरणे ,
जब मुझको रोशन कर जाती है ,
इन आँखों में तेरी तस्वीर ,
खुद बा खुद बन जाती है ,

हर शाम तेरे साए की तरह ,
मुझे तेरा अहसास कराती है ,
तू दूर हों या पास मेरे ,
पर निगाहे तुझे करीब पाती है ,

तू साथ होता है तो ,
ख़ामोशी भी गुनगुनाती है ,
बस गया है मेरी रूह में तू इस तरह ,
ठण्ड तुझे अगर लगे ,
तो कम्पन मुझे हों जाती है ,

तेरी हँसी की गूँज सुनकर ,
ये हवाए मुझे झूला झूलती है ,
तेरी हर छोटी ख़ुशी भी ,
मेरे होटो पर गुदगुदी कर जाती है ,

लम्हे यादगार बन जाते है ,
कुछ और यादें जुड़ जाती है ,
जब भी हाथ रखती हूँ दिल पर ,
धड़कन तेरा ही अहसास पाती है ,

इतनी खुशिया समेटू कैसे ,
पल पल झोली भर जाती है ,
तू आया मेरा नसीब बनके ,
हर रात हलके से कह जाती है ,

पहली बूँद बारिश की,
जब मुझको छू कर जाती है ,
तुझे महसूस कर सकती हूँ ,
तेरी बहुत याद आती है |

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Hindi Poems

Bahta chala :)

जहाँ हर मोड़ पर था किनारा,
वहाँ दरिया ही दरिया पा रहा हूँ,
लहरें तेज होती जा रही है,
जाने कहाँ चला जा रहा हूँ,
इन लहेरो की थपेड़ो में खुद,
को तन्हा पा रहा हों,
जहां राहे खुद बनाता था,
वहाँ बस बहता चला जा रहा हूँ |

ख्वैशे खुली हवा में थी कभी ,
आज पिंजरे में कैद हों गयी ,
मंजिल को करीब से किया महसूस ,
पर आखिरी कोशिश ख़ाली रह गयी ,
जो हवा पत्तो से लिपट के झूमती थी ,
वो आज टैहैनियों में उलझ कर रह गयी ,
इन्ही उलझनों के बीच उलझा जा रहा हों ,
जहाँ हर मोड़ पर था किनारा,
वहाँ दरिया ही दरिया पा रहा हूँ |

ज़िन्दगी इतनी तो सूनी ना थी ,
न थी खुशियाँ इतनी अजनबी ,
आँखों में सपने तो आज भी है ,
पर उन्हें पूरी करने की ख्वाइश नहीं बची ,
जिन लम्हों पर मुसकुराता था कभी ,
आज वहाँ अश्क बहा रहा हूँ,
जहाँ हर मोड़ पर था किनारा,
वहाँ दरिया ही दरिया पा रहा हूँ ,

छोड़ा ना खुद को खाली ,
इस तन्हाई के आगोश में ,
खुद को रखा बचाके ,
गमो की परछाई से ,
डरा ना कभी ये दिल ,
वक़्त की आजमाइश से ,
पर कदम अब लड़खड़ा रहें है ,
मै कुछ थक सा चुका हूँ ,
जहाँ हर मोड़ पर था किनारा,
वहाँ दरिया ही दरिया पा रहा हूँ ,

करवट ले रहें है लम्हे ,
फिर भी वक़्त थम सा गया है ,
हर नज़ारा वही है ,
फिर भी सब बदला हुआ है ,
शिकायत खुद से है या नहीं ,
समझ नहीं पा रहा हूँ ,

जहाँ हर मोड़ पर था किनारा,
वहाँ दरिया ही दरिया पा रहा हूँ ,
जहां राहे खुद बनाता था ,
वहाँ बस बहता चला जा रहा हूँ |