Bahta chala :)

जहाँ हर मोड़ पर था किनारा,
वहाँ दरिया ही दरिया पा रहा हूँ,
लहरें तेज होती जा रही है,
जाने कहाँ चला जा रहा हूँ,
इन लहेरो की थपेड़ो में खुद,
को तन्हा पा रहा हों,
जहां राहे खुद बनाता था,
वहाँ बस बहता चला जा रहा हूँ |

ख्वैशे खुली हवा में थी कभी ,
आज पिंजरे में कैद हों गयी ,
मंजिल को करीब से किया महसूस ,
पर आखिरी कोशिश ख़ाली रह गयी ,
जो हवा पत्तो से लिपट के झूमती थी ,
वो आज टैहैनियों में उलझ कर रह गयी ,
इन्ही उलझनों के बीच उलझा जा रहा हों ,
जहाँ हर मोड़ पर था किनारा,
वहाँ दरिया ही दरिया पा रहा हूँ |

ज़िन्दगी इतनी तो सूनी ना थी ,
न थी खुशियाँ इतनी अजनबी ,
आँखों में सपने तो आज भी है ,
पर उन्हें पूरी करने की ख्वाइश नहीं बची ,
जिन लम्हों पर मुसकुराता था कभी ,
आज वहाँ अश्क बहा रहा हूँ,
जहाँ हर मोड़ पर था किनारा,
वहाँ दरिया ही दरिया पा रहा हूँ ,

छोड़ा ना खुद को खाली ,
इस तन्हाई के आगोश में ,
खुद को रखा बचाके ,
गमो की परछाई से ,
डरा ना कभी ये दिल ,
वक़्त की आजमाइश से ,
पर कदम अब लड़खड़ा रहें है ,
मै कुछ थक सा चुका हूँ ,
जहाँ हर मोड़ पर था किनारा,
वहाँ दरिया ही दरिया पा रहा हूँ ,

करवट ले रहें है लम्हे ,
फिर भी वक़्त थम सा गया है ,
हर नज़ारा वही है ,
फिर भी सब बदला हुआ है ,
शिकायत खुद से है या नहीं ,
समझ नहीं पा रहा हूँ ,

जहाँ हर मोड़ पर था किनारा,
वहाँ दरिया ही दरिया पा रहा हूँ ,
जहां राहे खुद बनाता था ,
वहाँ बस बहता चला जा रहा हूँ |

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9 comments

  1. ram0singhal · July 19, 2010

    divine…….beautiful…

  2. Shikar · July 20, 2010

    Really nice monika !

  3. Anonymous · July 20, 2010

    Good one.

  4. Anonymous · July 20, 2010

    Its very touching..Loved it.

  5. vikas · July 20, 2010

    Awesome work!!

  6. Anonymous · July 20, 2010

    Love to read your blog everytime !

  7. Anonymous · August 5, 2010

    its toooooooo gud monika. I guess monika is the synonym of talent 🙂

  8. pratishtha · August 5, 2010

    its too gud monika. i guess monika stands for sea of talents 🙂

  9. abhishek · August 5, 2010

    ज़िन्दगी इतनी तो सूनी ना थी ,
    न थी खुशियाँ इतनी अजनबी ,
    आँखों में सपने तो आज भी है ,
    पर उन्हें पूरी करने की ख्वाइश नहीं बची ,
    जिन लम्हों पर मुसकुराता था कभी ,
    आज वहाँ अश्क बहा रहा हूँ,
    जहाँ हर मोड़ पर था किनारा,
    वहाँ दरिया ही दरिया पा रहा हूँ
    acchi rachna hai monika ji..

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