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The Whirlpool of Thoughts!

 

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Hindi Poems

Kadam ruk gaye !

वक़्त कुछ थम सा गया है ,
पर चाह है आगे बढने की ,
कोई डोर खीच रही है पीछे ,
जाने क्यों कदम रुक गए है यही ,

आज भी कोशिश जारी है ,
इस जाल से निकलने की ,
अपने पंखो को खोल कर ,
वैसे ही आसमा में उड़ने की ,

अंजानी सी कशमकश है ,
एक बैचैनी से है हों रही ,
क्या कुछ छूट रहा है पीछे ,
या है बस मेरी गलतफैमी ?

ढूंढ रही हूँ अपने अस्तित्व को ,
जो कही खो सा गया है ,
तन्हैयाँ भाने लगी मुझे ,
अकेलापन अपना सा हों गया है ,

रास्ते दिखाई दे रहें है ,
पर आगे बढने की हिम्मत नहीं ,
कोई डोर खीच रही है पीछे ,
जाने क्यों कदम रुक गए है यही !!

Hindi Poems

Ab aur nahi!!

Hi Friends,

I wrote it long back.I was going through my diary pages and found this one. Thought of including it to my collection 🙂

कुछ लिखने की आस है ,
चंद लफ्जों की तालाश है ,
दिल से निकले अलफ़ाज़ य़ू ,
कहीं बैचैन ना करदे इस कागज़ को ?

सबको राह मिल जाती है ,
एक मै ही यहाँ बेराह नहीं ,
रब सुनता है सबकी ,
बस पहुची मेरी आह नहीं ,

अपने हाथो में तलाशू उसे ,
पर वो लकीरे है ही नहीं ,
बदलना तो सभी चाहते है तकदीर ,
पर क्या सच में बदल सकता है कोई ?

डर नहीं इम्तिहान से ,
दर्द से भी कोई गिला नहीं ,
डरती हूँ ना कहना पड़े ,
बस मेरे खुदा, अब और नहीं !!