Ab aur nahi!!

Hi Friends,

I wrote it long back.I was going through my diary pages and found this one. Thought of including it to my collection 🙂

कुछ लिखने की आस है ,
चंद लफ्जों की तालाश है ,
दिल से निकले अलफ़ाज़ य़ू ,
कहीं बैचैन ना करदे इस कागज़ को ?

सबको राह मिल जाती है ,
एक मै ही यहाँ बेराह नहीं ,
रब सुनता है सबकी ,
बस पहुची मेरी आह नहीं ,

अपने हाथो में तलाशू उसे ,
पर वो लकीरे है ही नहीं ,
बदलना तो सभी चाहते है तकदीर ,
पर क्या सच में बदल सकता है कोई ?

डर नहीं इम्तिहान से ,
दर्द से भी कोई गिला नहीं ,
डरती हूँ ना कहना पड़े ,
बस मेरे खुदा, अब और नहीं !!

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8 thoughts on “Ab aur nahi!!

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