Zindagi ki Aajmaaish !!

पल दो पल की ज़िन्दगी ,
गहरी सोच में डूबी हुई ,
तमाशा बनके रह जाती है ,
जो हम हों जाये इसके बस में कहीं,

ज़माने के सामने लगती है,
हमारे दर्द की नुमाइश ,
भारी लगने लगती है ,
ज़िन्दगी की आजमाइश.

गुम  हों जाते है उन रहो पर,
जिसकी कोई मंजिल नहीं ,
अनदेखे कर देते है वो दरवाजे ,
जो हमारे लिए खुले अभी अभी .

क्यों खुली आँखों से भी ,
कुछ दिखाई नहीं देता ?
क्यों जो सब समझाना चाहते है ,
वो सुनाई नहीं देता?

यह दिल बेचारा क्या करे,
कुछ सोच नहीं पाता,
बीते पलो में उलझ कर ,
बस वही ठहर जाता .

तो क्यों ना हम दिल को ,
दे थोड़ा सा आराम ,
और दिमाग का भी,
करे इस्तेमाल ,
दोनों के ताल मेल से ही ,
पूरी करे अपनी उड़ान ,

ज़िन्दगी चलती है वैसे ,
जैसे हम चलाना चाहते है,
और अपने आंसुयो का कारण,
हम किसी और को ठहराते है .

कोई साथ रहें ना रहें,
यह वक़्त रहता है साथ सदा,
खराब होती है परिस्थितिया .
वक़्त कभी बुरा नहीं होता.

ढूंढ  निकालो हर मुस्कान को,
हर पल जियो अपनी ख्वाइश से,
ना हटना कभी भी पीछे ,
ज़िन्दगी की आजमाइश से ||

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7 comments

  1. Moin · November 11, 2010

    awesome …..really very nice !!!!!

  2. Anonymous · November 11, 2010

    Awesome write up 🙂

  3. Mohit · November 11, 2010

    Too Good. Very Inspiring.

  4. Anonymous · November 11, 2010

    Good one.

  5. Monika Arya · November 13, 2010

    Thanks a ton everybody for your inspiring words:)

    • abhishek · November 22, 2010

      sunder rachna…aur yatharth se kareeb..

  6. Monika Arya · November 23, 2010

    Thank you soo much Abhishek 🙂

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