Yeh Ishq !

One more from my old stock .. I was just going through my diary.. Found this one.

Here it is.

कोसते है उस इश्क को,
जो अश्क बनके आता है,
बेवफाई किसी और की ,
और सजा कोई और पाता है ,


पूजते है उस इश्क को,
जो हमें जीना सिखलाता है,
उसकी एक मुस्कान में ,
पूरा जहां समां जाता है,

वो खुशनसीब होते है,
जहां इश्क इश्क को पाता  है,
कुछ किस्मत के मारे होते है,
जिन्हें यही इश्क तड़पता है,

मोहोब्बत होती है सच्ची सदा,
पर सबके दिल में बस्ती  नहीं,
एक बार जो करले अपना कब्ज़ा,
सब इसके बस में हों जाता है,

खुशाल करे, बेहाल करे,
सब इसकी मर्ज़ी होती है ,
कहने  को  चीज   है  छोटी  सी ,
पर  ज़िन्दगी  बदल  देती  है ,

कोसते है उस इश्क को,
जो अश्क बनके आता है,
पूजते है उस इश्क को,
जो हमें जीना सिखलाता है .

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5 comments

  1. Shashank · January 6, 2011

    Beautiful poem .

  2. Anonymous · January 6, 2011

    Thanks for posting such a touching poem.

    • avinashsahu · January 6, 2011

      lovely poem.. 🙂

  3. Monika Arya · January 6, 2011

    Thank you sooo much everyone:):)

  4. vidhya.shastri@gmail.com · January 28, 2011

    true 🙂

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