Kuch tum!

कुछ तुम आगे आए, कुछ हमने कदम बढाये, इतने करीब आ पहुंचे, की बन गए हमारे साए, कभी तुमको हंसाया हमने, कभी गुदगुदा दिया तुमने, आदत हों गयी की बैगैर तेरे, मुस्कुराना बंद कर दिया इन होटों ने, कुछ वो मेरी बातों को समझे , कुछ मै उनके जज्बातों को समझी, ये अहसास इतने सुहाने है, रहती हू मै इनमे खोयी खोयी, कभी मैंने उन्हें सताया, कभी वो…