Hindi Poems

Kuch tum!

कुछ तुम आगे आए,
कुछ हमने कदम बढाये,
इतने करीब आ पहुंचे,
की बन गए हमारे साए,

कभी तुमको हंसाया हमने,
कभी गुदगुदा दिया तुमने,
आदत हों गयी की बैगैर तेरे,
मुस्कुराना बंद कर दिया इन होटों ने,

कुछ वो मेरी बातों को समझे ,
कुछ मै उनके जज्बातों को समझी,
ये अहसास इतने सुहाने है,
रहती हू मै इनमे खोयी खोयी,

कभी मैंने उन्हें सताया,
कभी वो रूठ गए हमसे,
पर डोर इतनी मज़बूत थी ,
खीच लायी हमेशा उन्हें ,

कुछ पल उन्होंने सजाये,
कुछ लम्हे हमने बनाये,
ये पल मेरी ज़िन्दगी में,
असीम खुशियाँ है लाये,

कभी तेरी ख़ुशी के लिए,
मैंने अपने गम भुलाये,
कभी तूने मेरे संग रोने के लिए,
अपने कीमती पल गवाए,
है इतना कुछ हमारे दरमियान,
जो भूले ना भूलाए,

कुछ  तुम  आगे  आए,
कुछ  हमने  कदम  बढाये,
इतने  करीब  आ  पहुंचे ,
की बन  गए हमारे  साए!!

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