Kar Diya !!..

Jaan kar bhi anjanaa kar diya,
Un chand lamho ko bhi mujhse cheen liya,
Dil mai tha bahut kuch par keh na paya,
Mujhe ek chalaktae hue jaam ka paimana kar diya,

Kashish reh gayi sadiyo ke liye,
In aansoyoon ne mujhe tar batar kar diya,
Geela kagaz ban gaya hoon ab,
Na koi likh sake, na jala sake aisa haal kar diya..

Dil mai tha bahut kuch par keh na paya,
Mujhe ek chalaktae kyu jaam ka paimana kar diya!!

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Kuch tum!

कुछ तुम आगे आए,
कुछ हमने कदम बढाये,
इतने करीब आ पहुंचे,
की बन गए हमारे साए,

कभी तुमको हंसाया हमने,
कभी गुदगुदा दिया तुमने,
आदत हों गयी की बैगैर तेरे,
मुस्कुराना बंद कर दिया इन होटों ने,

कुछ वो मेरी बातों को समझे ,
कुछ मै उनके जज्बातों को समझी,
ये अहसास इतने सुहाने है,
रहती हू मै इनमे खोयी खोयी,

कभी मैंने उन्हें सताया,
कभी वो रूठ गए हमसे,
पर डोर इतनी मज़बूत थी ,
खीच लायी हमेशा उन्हें ,

कुछ पल उन्होंने सजाये,
कुछ लम्हे हमने बनाये,
ये पल मेरी ज़िन्दगी में,
असीम खुशियाँ है लाये,

कभी तेरी ख़ुशी के लिए,
मैंने अपने गम भुलाये,
कभी तूने मेरे संग रोने के लिए,
अपने कीमती पल गवाए,
है इतना कुछ हमारे दरमियान,
जो भूले ना भूलाए,

कुछ  तुम  आगे  आए,
कुछ  हमने  कदम  बढाये,
इतने  करीब  आ  पहुंचे ,
की बन  गए हमारे  साए!!

Yeh Ishq !

One more from my old stock .. I was just going through my diary.. Found this one.

Here it is.

कोसते है उस इश्क को,
जो अश्क बनके आता है,
बेवफाई किसी और की ,
और सजा कोई और पाता है ,


पूजते है उस इश्क को,
जो हमें जीना सिखलाता है,
उसकी एक मुस्कान में ,
पूरा जहां समां जाता है,

वो खुशनसीब होते है,
जहां इश्क इश्क को पाता  है,
कुछ किस्मत के मारे होते है,
जिन्हें यही इश्क तड़पता है,

मोहोब्बत होती है सच्ची सदा,
पर सबके दिल में बस्ती  नहीं,
एक बार जो करले अपना कब्ज़ा,
सब इसके बस में हों जाता है,

खुशाल करे, बेहाल करे,
सब इसकी मर्ज़ी होती है ,
कहने  को  चीज   है  छोटी  सी ,
पर  ज़िन्दगी  बदल  देती  है ,

कोसते है उस इश्क को,
जो अश्क बनके आता है,
पूजते है उस इश्क को,
जो हमें जीना सिखलाता है .

Zindagi ki Aajmaaish !!

पल दो पल की ज़िन्दगी ,
गहरी सोच में डूबी हुई ,
तमाशा बनके रह जाती है ,
जो हम हों जाये इसके बस में कहीं,

ज़माने के सामने लगती है,
हमारे दर्द की नुमाइश ,
भारी लगने लगती है ,
ज़िन्दगी की आजमाइश.

गुम  हों जाते है उन रहो पर,
जिसकी कोई मंजिल नहीं ,
अनदेखे कर देते है वो दरवाजे ,
जो हमारे लिए खुले अभी अभी .

क्यों खुली आँखों से भी ,
कुछ दिखाई नहीं देता ?
क्यों जो सब समझाना चाहते है ,
वो सुनाई नहीं देता?

यह दिल बेचारा क्या करे,
कुछ सोच नहीं पाता,
बीते पलो में उलझ कर ,
बस वही ठहर जाता .

तो क्यों ना हम दिल को ,
दे थोड़ा सा आराम ,
और दिमाग का भी,
करे इस्तेमाल ,
दोनों के ताल मेल से ही ,
पूरी करे अपनी उड़ान ,

ज़िन्दगी चलती है वैसे ,
जैसे हम चलाना चाहते है,
और अपने आंसुयो का कारण,
हम किसी और को ठहराते है .

कोई साथ रहें ना रहें,
यह वक़्त रहता है साथ सदा,
खराब होती है परिस्थितिया .
वक़्त कभी बुरा नहीं होता.

ढूंढ  निकालो हर मुस्कान को,
हर पल जियो अपनी ख्वाइश से,
ना हटना कभी भी पीछे ,
ज़िन्दगी की आजमाइश से ||

Kadam ruk gaye !

वक़्त कुछ थम सा गया है ,
पर चाह है आगे बढने की ,
कोई डोर खीच रही है पीछे ,
जाने क्यों कदम रुक गए है यही ,

आज भी कोशिश जारी है ,
इस जाल से निकलने की ,
अपने पंखो को खोल कर ,
वैसे ही आसमा में उड़ने की ,

अंजानी सी कशमकश है ,
एक बैचैनी से है हों रही ,
क्या कुछ छूट रहा है पीछे ,
या है बस मेरी गलतफैमी ?

ढूंढ रही हूँ अपने अस्तित्व को ,
जो कही खो सा गया है ,
तन्हैयाँ भाने लगी मुझे ,
अकेलापन अपना सा हों गया है ,

रास्ते दिखाई दे रहें है ,
पर आगे बढने की हिम्मत नहीं ,
कोई डोर खीच रही है पीछे ,
जाने क्यों कदम रुक गए है यही !!

Ab aur nahi!!

Hi Friends,

I wrote it long back.I was going through my diary pages and found this one. Thought of including it to my collection 🙂

कुछ लिखने की आस है ,
चंद लफ्जों की तालाश है ,
दिल से निकले अलफ़ाज़ य़ू ,
कहीं बैचैन ना करदे इस कागज़ को ?

सबको राह मिल जाती है ,
एक मै ही यहाँ बेराह नहीं ,
रब सुनता है सबकी ,
बस पहुची मेरी आह नहीं ,

अपने हाथो में तलाशू उसे ,
पर वो लकीरे है ही नहीं ,
बदलना तो सभी चाहते है तकदीर ,
पर क्या सच में बदल सकता है कोई ?

डर नहीं इम्तिहान से ,
दर्द से भी कोई गिला नहीं ,
डरती हूँ ना कहना पड़े ,
बस मेरे खुदा, अब और नहीं !!

Teri Yaad

This one is dedicated to all those who are in true love 🙂 🙂 ..Hope  you will like it 🙂

पहली बूँद बारिश की,
जब मुझको छू कर जाती है ,
तुझे महसूस कर सकती हूँ ,
तेरी बहुत याद आती है ,

हर दिन सूरज की किरणे ,
जब मुझको रोशन कर जाती है ,
इन आँखों में तेरी तस्वीर ,
खुद बा खुद बन जाती है ,

हर शाम तेरे साए की तरह ,
मुझे तेरा अहसास कराती है ,
तू दूर हों या पास मेरे ,
पर निगाहे तुझे करीब पाती है ,

तू साथ होता है तो ,
ख़ामोशी भी गुनगुनाती है ,
बस गया है मेरी रूह में तू इस तरह ,
ठण्ड तुझे अगर लगे ,
तो कम्पन मुझे हों जाती है ,

तेरी हँसी की गूँज सुनकर ,
ये हवाए मुझे झूला झूलती है ,
तेरी हर छोटी ख़ुशी भी ,
मेरे होटो पर गुदगुदी कर जाती है ,

लम्हे यादगार बन जाते है ,
कुछ और यादें जुड़ जाती है ,
जब भी हाथ रखती हूँ दिल पर ,
धड़कन तेरा ही अहसास पाती है ,

इतनी खुशिया समेटू कैसे ,
पल पल झोली भर जाती है ,
तू आया मेरा नसीब बनके ,
हर रात हलके से कह जाती है ,

पहली बूँद बारिश की,
जब मुझको छू कर जाती है ,
तुझे महसूस कर सकती हूँ ,
तेरी बहुत याद आती है |