Shairiya !

1 गमो कि महफिल मे आते है रोज़ हम , अश्को के प्याले से लब टकराते है रोज़ अब , छोड़ दिया इस मंज़र पर आकर आपने , कदम हमारे आते इस महफिल मे कब ?? 2 हर दिन को नए दिन का इंतज़ार है , बीते दिन की खामियों के लिए बीते दिन ही…