Hindi Poems

Zindagi ki Aajmaaish !!

पल दो पल की ज़िन्दगी ,
गहरी सोच में डूबी हुई ,
तमाशा बनके रह जाती है ,
जो हम हों जाये इसके बस में कहीं,

ज़माने के सामने लगती है,
हमारे दर्द की नुमाइश ,
भारी लगने लगती है ,
ज़िन्दगी की आजमाइश.

गुम  हों जाते है उन रहो पर,
जिसकी कोई मंजिल नहीं ,
अनदेखे कर देते है वो दरवाजे ,
जो हमारे लिए खुले अभी अभी .

क्यों खुली आँखों से भी ,
कुछ दिखाई नहीं देता ?
क्यों जो सब समझाना चाहते है ,
वो सुनाई नहीं देता?

यह दिल बेचारा क्या करे,
कुछ सोच नहीं पाता,
बीते पलो में उलझ कर ,
बस वही ठहर जाता .

तो क्यों ना हम दिल को ,
दे थोड़ा सा आराम ,
और दिमाग का भी,
करे इस्तेमाल ,
दोनों के ताल मेल से ही ,
पूरी करे अपनी उड़ान ,

ज़िन्दगी चलती है वैसे ,
जैसे हम चलाना चाहते है,
और अपने आंसुयो का कारण,
हम किसी और को ठहराते है .

कोई साथ रहें ना रहें,
यह वक़्त रहता है साथ सदा,
खराब होती है परिस्थितिया .
वक़्त कभी बुरा नहीं होता.

ढूंढ  निकालो हर मुस्कान को,
हर पल जियो अपनी ख्वाइश से,
ना हटना कभी भी पीछे ,
ज़िन्दगी की आजमाइश से ||

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Hindi Poems

Kadam ruk gaye !

वक़्त कुछ थम सा गया है ,
पर चाह है आगे बढने की ,
कोई डोर खीच रही है पीछे ,
जाने क्यों कदम रुक गए है यही ,

आज भी कोशिश जारी है ,
इस जाल से निकलने की ,
अपने पंखो को खोल कर ,
वैसे ही आसमा में उड़ने की ,

अंजानी सी कशमकश है ,
एक बैचैनी से है हों रही ,
क्या कुछ छूट रहा है पीछे ,
या है बस मेरी गलतफैमी ?

ढूंढ रही हूँ अपने अस्तित्व को ,
जो कही खो सा गया है ,
तन्हैयाँ भाने लगी मुझे ,
अकेलापन अपना सा हों गया है ,

रास्ते दिखाई दे रहें है ,
पर आगे बढने की हिम्मत नहीं ,
कोई डोर खीच रही है पीछे ,
जाने क्यों कदम रुक गए है यही !!