Kadam ruk gaye !

वक़्त कुछ थम सा गया है , पर चाह है आगे बढने की , कोई डोर खीच रही है पीछे , जाने क्यों कदम रुक गए है यही , आज भी कोशिश जारी है , इस जाल से निकलने की , अपने पंखो को खोल कर , वैसे ही आसमा में उड़ने की , अंजानी…