Hindi Poems · My Fav

Adat ho gayi..

इन  आँसुओ को  भी  बहने  की  आदत  हों  गयी ,
नींद को भी जगने की आदत हों गयी ,
हर नया जख्म पहले  से  ज्यादा  गहरा  लगने  लगा ,
मुस्कुराहट  को  चुप  रहने  की  आदत  हों  गयी .

वो  चंद  पल  खुशियों  के ,
दे  गए  हमे  दर्द  सदियों  का ,
उन  रास्तो  पर  चल  दिए  हम ,
जहाँ   पता  नहीं  मंजिल  का ,
थम  गए  है  यह  रास्ते  भी ,
अब  तो इन्हें  भी  रुकने  की  आदत  हों  गयी ,
इन आँसुओ को भी बहने की आदत हों गयी ,
मुस्कुराहट को चुप रहने की आदत हों गयी ..

खाली  करू  मै   किस  तरह ,
तेरे  इश्क  का  प्याला  भरा ,
पहुचे  न  तेरी  याद  भी ,
खुद  को  ले  जाऊं  मै  कहाँ,
आज  खामोशियो  को  भी  चिल्लाने  की  आदत  हों  गयी ,
इन आँसुओ को भी बहने की आदत हों गयी ,
मुस्कुराहट को चुप रहने की आदत हों गयी ..

बेखबर  तेरे  इश्क  ने  ,
रुसवां  किया  इस  दिल  को  य़ू ,
न  रहे  खुद  के  ही  हम ,
इस  कदर  बेघर  है  क्यों ?
जो  ख्वाब  सच्चे  लगते  थे ,
उन्हें  झुटलाने   की  आदत  हों  गयी ,

इन आँसुओ को भी बहने की आदत हों गयी ,
मुस्कुराहट को चुप रहने की आदत हों गयी ..

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